Desh ko samarpit pradhaan sevak

सच ही कहा गया है –किसी कार्य से केवल जुड़ना भर ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि इसके प्रति समर्पण का भाव होना ज़्यादा ज़रूरी है। समर्पण भाव का अर्थ है कार्य के प्रति श्रध्दा भाव होना। सरल शब्दों में कहे तो कार्य को पूजनीय बना लेना। ऐसा करके हम ईश्वर से जुड़ जाते हैं, और तब इसके सुपरिणाम प्रकट होने लग जाते हैं।

हमारे प्रधानमंत्री के कार्यों और उनके परिणामों से इस संपूर्ण कथन को जोड़ने का प्रयास कर रहा हूं। इससे संभवतः उनके व्यक्तित्व और कार्य के प्रति उनके समर्पण के भाव को बेहतर तरीके से समझा जा सके । इस सन्दर्भ में अभी केवल विगत सप्ताह भर में अख़बारों में छपे प्रमुख समाचारों और उन पर विशेषज्ञों की राय पर नजर डालना भर पर्याप्त होगा।

दुनिया की २० ताकतवर अर्थव्यवस्था के मंच, जी 20 के सम्मलेन का जो ग्रुप फोटो सेशन हुआ उसमें भारत को विगत 14 वर्षों में पहली बार प्रथम पंक्ति में स्थान मिला। विशेषज्ञ इसे चीन और विश्व की नजर में भारत के बड़ते रुत्बे के रुप में देखते हैं।

विगत दो वर्षों से प्रधानमंत्री जी के अथक प्रयासों का सुपरिणाम है की जी २० सम्मलेन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सभी मेहमानों को दरकिनार करते हुए, भारत के प्रधानमंत्री से मिलने उनके पास पहुंच गये। प्रधानमंत्री का चुम्बकीय व्यक्तित्व अचम्भित करने वाला है, जिन देशों में मोदी जी ने यात्राएँ की, वहां से आने वाले सेलानियों की संख्या में 14-16 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।

चीन की धरती पर प्रधानमंत्री जी ने पाकिस्तान और चीन का नाम लिये बिना आतंकवाद पर दोहरा मापदंड न अपनाने की और ऐसा करने वाले देशों को अलग थलग करने की अपील की| यहां तक की ऐसे देशों पर पाबंदी लगाने की वकालत की। ऐसा करना प्रधानमंत्री जी का विल पावर, सच उजागर करने का उनका साहस व देश के बढ़ते प्रभाव का परिचायक है।

डी जी सूचना विभाग चीन के ला कांग ने कहा – “पिछले दो वर्षो में (कुछ छोटे मोटे तनावों को छोड़कर) भारत चीन संबंधो में सुधार हुआ है। ऐसा भारतीय पीएम व चीनी राष्ट्रपति के चमत्कारिक व्यक्तित्व के करण संभव हो सका है।”

अमेरिका से सामरिक समझोतों को विश्व, भारत की ताकत में इजाफे के रूप में देख रहा है। अमेरिका से सामरिक समझोतों के विषय पर अमेरिका विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री के कथन से सहमत होते हुए माना की भारत और अमेरिका ने इतिहास की हिचकिचाहट से पीड छुड़ा लिया है।

जहां चाह, वहां राह, प्रधानमंत्री जी ने इस कथन को सत्य कर दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सानिध्य में देश नई उचाईयों को छु रहा है, और यह आगे भी यह सतत जरी रहेगा।