हताश विपक्ष की नकारात्मक राजनीति

संसद में पारित कृषि विधेयकों को लेकर कांग्रेस, शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल किसानों में भ्रम फैलाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। हताश विपक्ष की राज्यसभा में शर्मसार करने वाली हरकतों से यह स्पष्ट हो गया है कि संख्याबल न होने पर बाहुबल दिखाया जाएगा। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें कृषि उपज का सही दाम दिलाने की व्यवस्था करने पर विपक्षियों को इतना दर्द क्यों हो रहा हैं? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि दशकों तक कई बंधनों में जकड़े हुए किसानों को बिचौलियों से आजादी मिली है। इससे किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों को बल मिलेगा और उनकी समृद्धि सुनिश्चित होगी।

जो कांग्रेस एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (एपीएमसी) एक्ट में संशोधन को कुछ साल पहले चुनावी वायदा बनाकर वोट मांग रही थी, वही आज विरोध के लिए विरोध की राजनीति करने के लिए किसानों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की कोरोना महामारी के दौरान बड़ी-बड़ी समस्याओं का समाधान करने के कारण बढ़ती लोकप्रियता से घबराएं विपक्षी दल नकारात्मक राजनीति करने पर उतार आए हैं। जनता देख रही है कि कांग्रेस जैसे दल सक्षम, ऊर्जावान, पार्टी को दिशा देने वाले और जनता में स्वीकार्य नेताओं को पार्टी की कमान न सौंपने के कारण नकारा साबित हो रहे हैं। कांग्रेस में वंशवादी राजनीति के सहारे खुद को पार्टी में स्थापित करने की कोशिश कर रहे कुछ नेता पार्टी की खींचतान को बाहर जाने से रोकने के लिए केंद्र पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।

इसी तरह का भ्रम कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दल और अन्य तथाकथित सेक्युलर संगठनों ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर फैलाया था। नागरिकता संशोधन कानून 2019 से देश के किसी नागरिक का कोई संबंध ही नहीं हैं, इसके बावजूद केवल नकारात्मक राजनीति और मुस्लिम समुदाय में मोदी सरकार की छवि खराब करने के मकसद से सीएए को मुस्लिम विरोधी बताने की कोशिश की गई। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कई बार साफ किया था कि नागरिकता संशोधन कानून देश में नागरिकता देने के लिए है, किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं। इसके बावजूद भ्रम फैलाया गया। सब जानते हैं कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ कैसे-कैसे अत्याचार हो रहे हैं। इन देशों में अल्पसंख्यकों, खासतौर पर हिन्दुओं की आबादी लगभग समाप्त होने की तरफ है। इन देशों में सताये जा रहे अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए कानून में किए गए संशोधन को लेकर विपक्षी दलों ने देशभर में अराजकता फैलाने की कोशिश की।

दिल्ली में दंगे कराये गए। दिल्ली पुलिस ने दंगों का साजिश का खुलासा भी कर दिया है। आम आदमी पार्टी के एक पार्षद की बड़ी भूमिका भी सामने आई हैं।

याद कीजिए कुछ साल पहले तक भारतीय जनता पार्टी को शहरों और व्यापारियों की पार्टी बताने वाले राजनीतिक दलों की हालत आज क्या है। भाजपा को किसानों का विरोधी बताया जाता था। गांव, गरीब, किसान, मजदूर, दलित और मुस्लिमों के नाम पर राजनीति चमकाने वाले दलों को देश की जनता ने हाशिये पर पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि लोकसभा से पारित कृषि सुधार संबंधी विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच का काम करेंगे। नए प्रावधान लागू होने से किसान अपनी फसल को देश के किसी भी बाजार में अपनी मनचाही कीमत पर बेच सकेंगे। भाजपा के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने भी कहा है कि मंडी और न्यूनतम समर्थन दर (एमएसपी) थे, हैं और रहेंगे। उन्होंने किसानों की आर्थिक हालत में सुधार लाने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की है। मोदी सरकार किसानों की आर्थिक हालत में सुधार लाने के लिए लगातार प्रयत्न कर रही है। किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं।

कुछ समय पहले तक कांग्रेस के नेता आरोप लगाते थे कि मोदी सरकार कांग्रेस की अगुवाई वाली मनमोहन सिंह सरकार के कार्यों को ही नाम बदलकर आगे बढ़ा रही है। एक समय तो कांग्रेस के ही नेताओं ने कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए चुनावी वायदे किए थे। अब यह भी समझ से परे की बात है कि एक तरफ से कांग्रेस के नेता यह दावा करते हैं कि यूपीए सरकार की नीतियों, योजनाओं और कार्यों का नाम बदलकर मोदी सरकार काम कर रही हैं। अपने कार्यों को पूरा होने पर तो कांग्रेसियों को खुशी मनानी चाहिए, न कि भ्रम फैलाना चाहिए। नकारात्मक राजनीति करने वाले कांग्रेस के नकारा नेता मोदी सरकार की विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ता से कार्य करने के कारण हताश हो रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान जानमाल को नुकसान से बचाने के लिए दुनियाभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा हो रही है। भारत की तरफ से अन्य देशों की सहायता भी की गई। यह सब विपक्षी दलों को अच्छा नहीं लग रहा है। विदेशी रणनीति के मोर्चे पर भी मोदी सरकार ने अपनी क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया है। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी का किसानों के लिए नाटक का नतीजा जनता देख ही रही है। हैरानी की बात है कि आम आदमी पार्टी के नेता भी किसानों की बात कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में तो सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के नेता अम्फान तूफान से प्रभावित किसानों के लिए दी गई केंद्रीय सहायता राशि को ही चट कर गए। हताश और निराश नकारा नेताओं की राजनीति को जनता पूरी तरह समझ चुकी है।

यही कारण है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही वहां विपक्षी दल धराशायी हो चुके हैं। अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में भी कई राज्यों में विपक्षी दलों को जोर से झटका लगने वाला है।

(भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि विषयों पर बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं। लेख में विचार उनके निजी हैं।)