Modi government kneels ahead of inflation

मोदी सरकार के आगे घुटने टेकती महंगाई

पिछले साठ सालों में जो गड्डा पिछली सरकार खोद कर गई थी, वह दो सालों में नहीं भर सकता। यही बात माननीय वित्तमंत्री जी ने राज्य सभा में कहा था “सरकार महंगाई को काबू रखने के लिए सभी कदम उठा रही है। कांग्रेस पार्टी के कामों की वजह से रेलवे की हालत काफी खराब हो गई थी, रेलवे बोर्ड ने अंतरिम बजट से पहले सरकार से संपर्क साधा और किरायों में बढ़ोतरी की मांग की।” उनका कहना था कि रेलवे को 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था, जिसकी भरपाई जरूरी थी।

मगर फिर भी मोदी सरकार ने दो साल के कार्यकाल में इस गड्डे को भरने का अथक प्रयास जरुर किया है और बहुत हद तक इसे भरने में सफलता भी हासिल की है। मोदी सरकार की “सर्वे भवन्तु सुखिनः” वाली योजनाएं इस बात का प्रमाण है –

1. हाशिए पर मौजूद लोगों को आर्थिक विकास में शामिल किया गया. इसके लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. जैसे कि जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना.

2. बुनियादी सुविधाओं वाले सरकारी-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल नाकाम होता जा रहा था. प्रधानमंत्री ने इस मॉडल में दोबारा जान फूंकी है.

3. रेलवे का आधुनिकीकरण शुरू हुआ.

4. प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन में घोर पूंजीवाद की बू आती थी उसको हटाने की कोशिश की गई है. कोयला नीलामी और स्पेक्ट्रम नीलामी में हमने देखा कि वो ख़ास पूंजीपति का फायदा करा रहे हैं

5. निवेशकों के लिए माहौल तैयार करना, मेक इन इंडिया, ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं से निवेशकों को लुभाने की कोशिश करना. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में सुधार लाना

मोदी सरकार की चिंता की लकीरें महंगाई बढ़ने के साथ-साथ बढती जाती है। आए दिन महंगाई से ग्रस्त आम जनता के उत्थान के लिए बैठकें होती रहती है, एक उच्च-स्तरीय बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कृषि मंत्री राधामोहन सिंहखाद्य मंत्री रामविलास पासवानपरिवहन मंत्री नितिन गडकरीवाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण और शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू के साथ मूल्य नियंत्रण करने के रास्तों के बारे में विचार-विमर्श किया।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि जब भी राज्यों की ओर से मांग पैदा हो बफर स्टॉक से अधिक दलहन को निकाला जाए और इसके साथ कीमत को नियंत्रित करने के लिए म्यांमार और अफ्रीका से इसका आयात किया जाए।

वित्त मंत्री जी ने यह भी कहा कि कमी को पूरा करने के लिए सार्वजनिक और निजी रास्तों से आयात की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जाए। इस बैठक में आर्थिक मामलों के विभाग और राजस्व विभाग के सचिवों के साथ-साथ मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भी भाग लिया।

सरकार ने स्थितियों से निपटने के लिए पहले ही बफर स्टॉक से बाजार में 10,000 टन दलहन को जारी कर रखा है। सरकार की अपने नवसृजित बफर स्टॉक से और आयात के जरिये आपूर्ति बढ़ाने की दोहरी नीति है।

महंगाई से ग्रस्त आम जनता को राहत देते हुए, कीमतों को नरम करने के लिए करीब 50 लाख टन चावल राज्य सरकारों के जरिए खुले बाजारों में जारी किया गया। साथ ही प्याज के निर्यात को हतोत्साहित करने तथा घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने एवं कीमतों को नियंत्रित करने के मकसद से इस पर न्यूनतम निर्यात मूल्य 300 डॉलर प्रति टन लगाया गया है। इसी प्रकार की व्यवस्था वाणिज्य मंत्रालय आलू पर करेगा। वहीं दाल तथा खाद्य तेलों के संदर्भ में राज्यों को स्थानीय मांग पूरी करने के लिए इन जिंसों के सीधे आयात के लिए कर्ज सहायता दी जाएगी।

यहाँ तक की जमाखोरी को ‘राष्ट्र विरोधी’ गतिविधि बताते हुए खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने राज्य सरकारों से कहा कि वे महंगाई पर नियंत्रण के लिए राजनीति से ऊपर उठकर काम करें और आवश्यक वस्तू अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करें।

राम विलास पासवान जी ने राज्यसभा में कहा कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मौजूदा उछाल जमाखोरों द्वारा पैदा किया गया है और यह अस्थायी घटनाक्रम है। पासवान ने कहा, ‘महंगाई को नियंत्रित करना राष्ट्रीय मुद्दा है। संघीय ढांचे में कीमतों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य दोनों की है। केंद्र और राज्यों के बीच कोई टकराव नहीं होना चाहिए। हमें इस मसले पर राजनीतिक लाभ नहीं लेना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि आवश्यक जिंस कानून अस्तित्व में है। मसला यह है कि कितना प्रभावी ढंग से इस कानून को लागू किया जा सकता है।

महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश के तहत सरकार ने जमाखोरी को गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए कानून में संशोधन करने और राज्यों को बाजार में हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाने के वास्ते एक मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाने का निर्णय भी किया।

वो दिन भी दूर नहीं जब महंगाई पुर्णतः काबू में आ जायगी, काफी हद तक महंगाई की कमर तोड़ने में सफल रहीं मोदी सरकार आने वाले दिनों में महंगाई और विपक्ष दोनों को ही हाशिये पर ले आएगी।

एक कहावत है “बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी”, आज एक और आतंकवादी मारा गया, कल और मारे जाएँगे। आतंकवादियों का यही हश्र होता आया है, और आगे भी होता रहेगा। मुठभेड़ में मारा गया 10 लाख का इनामी हिजबुल आतंकी बुरहान वानी भी जाकिर नाइक का समर्थक था।

सभी जवानों की बहादुरी को सलाम तथा इस कामयाबी पर सह्रदय शुभकामनाएँ। और सभी आतंकवादियों को एक चेतावनी है कि जिस देश को यहाँ के युवा अपनी माँ समझे उस राष्ट्र का तुम बाल भी बांका नहीं कर सकते।