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गहलोत का बौनापन और सचिन का बड़प्पन सामने आया

राजस्थान की राजनीति के दिग्गज और राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट के कारण जहर का घूंट पीना पड़ा। राजस्थान कांग्रेस में महीनाभर चली कुश्ती में अशोक गहलोत अपने से बहुत छोटे सचिन पायलट से मात खा गए। इस लड़ाई में राजनीति के दिग्गज अशोक गहलोत के कद को उनकी औछी बयानबाजी ने बहुत बौना बना दिया और सचिन पायलट के चुप रहने और शालीनता से प्रश्नों का उत्तर देने के कारण उनका कद बढ़ा है। अशोक गहलोत के निकम्मा बताने के बावजूद सचिन ने कोई तीखी टिप्पणी नहीं की। इस प्रकरण ने अशोक गहलोत के बौनापन को सचिन पायलट के बड़प्पन को सबके सामने ला दिया है।

राजस्थान कांग्रेस की गुटबाज़ी को संभालने में कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। मुख्यमंत्री गहलोत से सचिन पायलट की नाराज़गी खुलेआम होने और विधायकों की बगावत को लेकर कांग्रेस के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी पर बेवजह आरोप लगाए। भाजपा पर लगाए आरोपों के कारण कांग्रेस का दिवालियापन भी सामने आया। कांग्रेस के नेताओं में धैर्य और साहस की कमी भी साफतौर पर दिखाई दी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाकर पुलिस को जांच सौंपी। यह सब भाजपा पर दबाव बनाने के लिए किया गया। पुलिस की जांच में भी कुछ नहीं निकला। राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी खुलासा किया है कि अशोक गहलोत ने होटलों में रहने और खाने पर दस करोड़ रुपये खर्च किए। अशोक गहलोत ने यह सब अपनी दूसरी पीढ़ी को राजनीति में स्थापित करने के लिए ही किया। अब गहलोत को मुख्यमंत्री पद जाना तो तय है। न खुद राजनीति में खड़े रह पाएं और न ही अपनी आने वाली पीढ़ी को स्थापित कर पाए। सचिन के राजनीति में बढ़ते कद के कारण अशोक गहलोत अपनी नई पीढ़ी को स्थापित करने में जल्दबाजी कर गए। गहलोत के सामने मेहनती युवा सचिन पायलट के एक जबर्दस्त चुनौती बन रहे थे।

सचिन पायलट को मनाने में कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका बाड्रा, के सी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को दम लगाना पड़ा। सोनिया गांधी ने सचिन पायलट और बागी विधायक की शिकायतों का समाधान करने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने का ऐलान किया है। जाहिर है कि कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट की नाराज़गी दूर करने के लिए अशोक गहलोत पर कार्रवाई करेगी। कांग्रेस के नेताओं ने विधायकों की बगावत को लेकर जिस तरह से सचिन पायलट पर वार किए, उससे पार्टी नेतृत्व का बौनापन सबको दिखाई दिया। कांग्रेस के नेताओं ने सचिन पायलट पर तरह-तरह के आरोप लगाए। कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा पर सवाल उठाए और अब खुद ढेरों सवालों को लेकर चुप्पी मार गए। सारे प्रकरण में कांग्रेस ने खोया ही खोया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के बावजूद सचिन पायलट ने बहुत कुछ पाया है। जनता की नजरों में उनकी छवि एक धैर्यशील और साहसी नेता की बनी है। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री की शिकायतों पर पहले कांग्रेस आलाकमान ने कोई ध्यान क्यों नहीं दिया। महीनाभर चले इस नाटक का अंत अगर सचिन पायलट की शिकायतों को दूर करने के आश्वासन से ही होना था तो यह तो पहले ही दिन हो सकता था। पायलट की शिकायतों को दूर करने के बजाय कांग्रेस आलाकमान भाजपा पर ही हमले करने लगा। केंद्रीय मंत्रियों पर आरोप लगाए गए। राजस्थान भाजपा में गुटबाजी की खबरे चलवाईं गई। हरियाणा की भाजपा सरकार को लपेटा गया। आखिर में सोनिया, राहुल और प्रियंका ने भी मान लिया कि सचिन और उनके साथी विधायकों ने केवल अशोक गहलोत से नाराजगी के कारण बगावत की थी। अब जैसे सचिन को मनाया है, वैसे ही कांग्रेस आलाकमान को अपनी नाकामी को मानते हुए भाजपा पर आरोप लगाने के लिए माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस और कम्युनिस्टों की गलतियों की नतीजा है नेपाल का आंख दिखाना

भारत के कम्युनिस्टों के दवाब में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की नेपाल में की गई भूलों का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। 2004 से 2014 तक कांग्रेस अपनी अगुवाई में सरकार चलाने और बचाने के लिए कम्युनिस्टों का सहारा लेना पड़ा। 2004 में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कांग्रेस को समर्थन दिया और उसके एवज में लोकसभा अध्यक्ष पद पर सोमनाथ चटर्जी को बैठाया था। उस चुनाव में माकपा के 43 सदस्य जीते थे और भाजपा की कांग्रेस से केवल सात सीटें कम थी। भारत के वामदलों ने भी कांग्रेसनीत यूपीए सरकार को दवाब में लेकर मनमानियां भी की। कम्युनिस्टों की मनमानियां और कांग्रेस की गलतियों का ही नतीजा है कि एक तरफ लद्दाख में सालभर पहले कठिन हालातों में बनाई गई सड़क को लेकर चीन विवाद खड़ा कर रहा है तो दूसरी तरफ नेपाल भारत के हिस्से को अपना बता रहा है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा पिछले दिनों लिपुलेख पास के किए गए उद्घाटन पर नेपाल की तरफ से विरोध किया गया। नेपाल के विरोध को खारिज करते हुए भारत सरकार ने साफ-साफ बताया कि यह सड़क हमारी सीमा में पड़ती है। हमारे विरोध के बावजूद नेपाल ने एक नया नक्‍शा जारी किया। इस नक्‍शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल की सीमा में दिखाया गया। ये इलाके अभी तक नेपाल के नक्शे में थे भी नहीं।

अभी तो भारत के दवाब में नेपाल में नए नक्शे को मंजूरी देने को संविधान में संशोधन करने लिए बुलाई गई संसद की बैठक फिलहाल टाल दी गई है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल मुकुंद नरवाणे ने नेपाल के विरोध पर कहा था कि हमे मालूम है कि किसके कहने पर विरोध किया जा रहा है। नरवाणे ने चीन का नाम नहीं लिया पर नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल ने नरवाणे के बयान को गोरखा सैनिकों का अपमान बता दिया। जाहिर है कि चीन का बिना नाम लिए जनरल नरवाणे के बयान से नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार को बुरा लगा। नेपाल में पिछले कई वर्षों से जारी राजनीतिक अस्थिरता का चीन लगातार फायदा उठा रहा है। चीन के कारण ही नेपाल बार-बार भारत विरोधी हरकतें करता रहा है। नेपाल में 20 वर्ष पूर्व राजपरिवार के नौ सदस्यों की हत्या कर दी गई। इसके बाद राजा ज्ञानेन्द्र शाह ने सात साल तक सत्ता संभाली। 2008 राजशाही खत्म करके नेपाल को लोकतांत्रिक देश घोषित कर दिया गया। इसके लिए लंबे समय तक चीन की शह पर आंदोलन किए गए। भारत के कम्युनिस्टों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। राजा ज्ञानेंद्र पर राज परिवार की हत्या करने का शक भी जताया गया। माना जाता रहा है कि चीन की साजिश के तहत राज परिवार के सदस्यों की हत्या कराई गई।

नेपाल में 2008 में कम्युनिस्टों का स्थापित करने में कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की बड़ी भूमिका रही। 2018 में सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली दूसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने। ओली के वामपंथी गठबंधन ने करीब दो महीने पहले हुए संसदीय और स्थानीय चुनावों में नेपाली कांग्रेस को हराया था। ओली इससे पहले भी 11 अक्टूबर 2015 से 3 अगस्त 2016 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यूसीपीएन-माओवादी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी नेपाल और मधेशी राइट्स फोरम डेमोक्रेटिक के अलावा 13 अन्य छोटे दल ओली का समर्थन कर रहे हैं।

नेपाल के संसदीय चुनाव में हमेशा भारत की बड़ी भूमिका रही है। बड़ी संख्या में भारत के लोग वहां नागरिक हैं और राजनीति में भूमिका निभाते रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार नेपाल में 81.3 प्रतिशत हिंदू हैं। विश्व के एकमात्र हिन्दू राष्ट्र रहे नेपाल को 2008 में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया। दुनिया में कम्युनिस्टों का राज वाला नेपाल छठां देश बन गया। 2008 में कांग्रेस सरकार ने कम्युनिस्टों के दवाब में मधेशियों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। नेपाल का हाल यह है कि वहां दस साल में दसवीं बार सरकार बदली है। कम्युनिस्टों ने सत्ता में रहते हमेशा भारत का विरोध किया। था। नरेंद्र मोदी की 2014 की नेपाल यात्रा के बाद वहां अप्रैल 2015 में आए भीषण भूकंप में भारत की तरफ से की गई भरपूर मदद से संबंध अच्छे बने। परंतु नवंबर 2015 में नेपाल ने अपना नया संविधान लागू किया तो संबंधों में फिर खटास पड़ गई। भारत-नेपाल सीमा पर आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही पर अघोषित रोक लगने से चीन ने भारत विरोधी भावनाएं भड़काई। नेपाल की मीडिया पर चीन का प्रभाव ज्यादा रहा है। चीन के दवाब में नेपाली मीडिया ने भी भारत विरोधी हवा बनाई। नेपाल पहले भी भारत पर दवाब बनाने के लिए चीनी कार्ड खेलता रहा है। चीन ने नेपाल को सामान देने का जमकर प्रचार कराया। ओली पद ग्रहण के बाद भारत आने की बजाय चीन जाने का कार्यक्रम बना रहे थे। नेपालियों के चौतरफा दबाव के कारण उन्हें अपना कार्यक्रम रद्द करके पहले भारत आना पड़ा। कांग्रेस सरकार की ढिलाई के कारण 2008 में प्रचंड ने प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले चीन की यात्रा की। भारत में कम्युनिस्टों ने जो गलतियां उसका नतीजा तो वे भुगत रहे हैं। 2019 में वामदल महज पांच सीटों पर सिमट गए। पश्चिम बंगाल में उनका पूरी तरह सफाया हो गया है। कम्युनिस्टों के राज में नेपाल में लगातार जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच बार-बार फिर से हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग की जा रही है। नेपाल के फिर से हिन्दू राष्ट्र घोषित होने के बाद ही तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं।

मोदी का आर्थिक पैकेज- हर किसी को राहत

कोरोना महामारी के जारी प्रकोप के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ₹20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का विवरण देने से पहले ही भारतीय शेयर बाजार चहक उठा। देश की जीडीपी के दस प्रतिशत के बराबर आर्थिक पैकेज दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज हैं। भारत सरकार की ओर से घोषित इस पैकेज में गरीबों के लिए अनाज उपलब्ध कराने तथा गरीब महिलाओं व बुजुर्गों को नकद मदद देने के लिए घोषित ₹1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को भी शामिल किया गया है। सरकार अभी तक कुल मिलाकर ₹7.79 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा कर चुकी है। अब ₹12.22 लाख करोड़ का पैकेज एमएसएमई, दिहाड़ीदार मजदूरों, मध्यम वर्ग, कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों के लिए हैं। पैकेज में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। 15 हजार के कम वेतन वालों की सरकार सहायता करेगी। वेतन का 24 प्रतिशत सरकार पीएफ खाते में जमा करेगी।
यह मोदी का ही करिश्मा है कि 130 करोड़ की आबादी वाले देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या बहुत कम रही। प्रधानमंत्री ने समय रहते और जनता को जागरूक करते हुए देश में लॉकडाउन लागू किया। ज्यादातर स्थानों पर लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन भी किया गया। प्रधानमंत्री ने इस आपदा को देश के लिए एक अवसर बना दिया। अब यह सभी मान रहे हैं कि हमें अपने गांव, खेत, किसान, कुटीर उद्योग को प्राथमिकता देते हुए उद्योगों को विकसित करना होगा। सबकुछ देश में बने इसके लिए तो मोदी सरकार पहले से प्रयासरत थी। आपदा के दौरान हम जगह-जगह करोड़ों लोगों को तकलीफ उठाते हुए अपने-अपने गांव की तरफ लौटते देख रहे हैं। लाखों लोग पैदल चलकर ही गांव पहुंच रहे हैं। यह अवसर है कि हम गांवों और खेतों में रोजगार के अवसर बढ़ाएं। गांवों में कुटीर उद्योग को बढ़ाएं। इसके लिए सरकार ने कई घोषणाएं की है। प्रधानमंत्री ने लघु उद्योगों के लिए खजाना खोल दिया है। तीन लाख करोड़ का कर्ज बिना गांरटी एमएसएमई के लिए देने का ऐलान किया गया है। एक साल ईएमआई में भी राहत दी गई है। इससे लघु उद्योगों में कार्यरत 11 करोड़ से ज्यादा श्रमिकों को इसका फायदा मिलेगा। एमएसएमई के लिए सरकार ने बहुत राहत दी है। मोदी सरकार की इस पहल से देश के मध्यम, लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि एमएसएमई को ज्यादा टर्न ओवर होने पर भी दर्जा नही बढ़ाया जाएगा। यानी अब ये उद्योग अपना विस्तार कर सकते हैं। कुल मिलाकर 45 लाख उद्योगों को इसका फायदा मिलेगा। जाहिर है कि सरकार की पूरी कोशिश है गरीब श्रमिकों को बेरोजगारी का सामना न करना पड़े। सरकार का पूरा जोर है कि छोटे छोटे निवेश वाले उद्योग बढ़े। भारत सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी कंपनियों को न्योता दे रही है। कुछ विदेशी कंपनियों ने भारत में निवेश की इच्छा जताई है। हरियाणा में तो ऐसी कंपनियों के लिए जमीन भी तय कर दी गई है।

अभी कुछ दिन और हमें कोरोना के साथ रहना है। कोरोना से लड़ना भी है। इसके लिए म़ॉस्क लगाकर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए कामकाज पर ध्यान देना है। प्रधानमंत्री की पूरी कोशिश है कि देश में स्वदेशी वस्तुओं का चलन बढ़े। इसी कड़ी में हमारे लोकप्रिय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने भारत में बने उत्पादों का उपयोग करने की अपील की है। उनका कहना है कि इस तरह हम पांच साल में देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कैंटीनों पर केवल स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी। 1 जून 2020 से देशभर की केंद्रीय पुलिस बलों की सभी कैंटीनों में केवल स्वदेशी उत्पाद मिलेंगे। केंद्रीय पुलिस बलों के दस लाख कर्मचारी और लगभग 50 लाख परिजन स्वदेशी उत्पाद ही इस्तेमाल करेंगे। हर साल इन कैंटीन से 2800 करोड़ का सामान खरीदा जाता है। इन कैंटीन में अब स्वदेशी उत्पाद ही बेचने से कुटीर उद्योगों को बाजार के लिए नहीं भटकना पड़ेगा। यह तो अभी शुरुआत है। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सभी को आगे आना होगा। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा भी है कि आपदा के कारण संकेत, संदेश और अवसर मिला। भारत में एन-95 मास्क और पीपीई किट बन रहे हैं। पहले पीपीई किट बनते ही नहीं थे और एन-95 मास्क बहुत कम बनते थे। दोनों की ज्यादा जरूरत भी नहीं थी। आपदा के दौरान ही भारत में अब दो-दो लाख एन-95 मास्क और पीपीई किट बन रहे हैं। यह हमारे लिए बहुत शुभ संकेत है।

(लेखक भारतीय जनता पार्टी के महासचिव हैं और सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा राजनीतिक विषयों पर बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं।)

कोरोना पर प्रहार – हमारे संस्कार और आहार

कोरोना महामारी के प्रकोप के बचाने के लिए जारी लॉकडाउन तो अगले कुछ दिनों बाद समाप्त हो सकता है, पर कोरोना का असर नहीं खत्म होगा। फिलहाल हमें कोविड-19 वायरस के साथ रहकर अपना जीवन बचाना है। सफर के दौरान जगह-जगह सड़क किनारे लिखा मिलता है न, सावधानी हटी- दुर्घटना घटी। यही सीख अब कोरोना के पूरी तरह समाप्त होने के तक हमें जारी रखनी है। हमें साफ रहना है। पौष्टिक भोजन करना है। स्वस्थ रहने के लिए घरों में ही प्राणायाम, आसन, योग और व्यायाम करना है। बाहर निकलना भी है तो मुहं पर मॉस्क लगाकर, हर जगह शारीरिक दूरी का ध्यान रखना है। स्वच्छता, पौष्टिक भोजन, व्यायाम और आयुर्वेद, हमारी संस्कृति और परम्परा के अभिन्न अंग रहे हैं। आपदाकाल में बिना साधन महानगरों से गांवों की ओर लौटते करोड़ों लोगों ने अहसास कराया कि हमें अपनी जड़ों को मजबूत करना होगा। हम अपनी परम्पराओं पर चलकर ही कोरोना जैसी आपदाओं का मुकाबला कर सकते हैं। महानगरों में रिक्शा चलाने, कारखानों में काम करने वाले या दूसरे काम करने वाले अब गांव आकर खेती कर रहे हैं या खेतों में मजदूरी कर रहे हैं। बहुत से लोग बटाई पर खेत लेकर सब्जियां उगा रहे हैं। यानी जो खेत मजदूरों के कारण खाली पड़े रहते हैं थे, आज उनमें सब्जियां पैदा हो रही हैं। कोरोना ने हमें सीख दी है कि अपना गांव ही सबसे बेहतर हैं। अब सरकार भी ऐसी योजनाएं बना रही हैं कि कारखाने-फैक्टरी लोगों के पास आएं, लोगों को कामकाज के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े।

दुनिया के बड़े-बड़े देश कोरोना के आगे मजबूर हो रहे हैं। भारत में 135 करोड़ की जनसंख्या के बावजूद संक्रमित मरीजों की संख्या बहुत कम है। हमारे यहां भोजन करने से पहले हमेशा अच्छे तरीके से हाथ धोने की परम्परा रही है। हाथ जोड़ने और हाथ धोने की परम्परा के कारण हमारे पर कोरोना की मार कम रही है। अमेरिका, चीन, इटली, फ्रांस, स्पेन और अन्य विकसित भी कोविड-19 से निपटने के लिए अभी कोई वेक्सीन विकसित नहीं कर पाए हैं। हो सकता है अभी इसमें समय लगेगा। हमारा देश अपने लोगों की प्रतिरोधक क्षमता के कारण भी जल्दी ही महामारी पर काबू पाने में सफल होगा। इस दौरान तमाम तरह की रिसर्च सामने आ रही हैं। आयुर्वेद की भूमिका भी बहुत बढ़ गई है। कोरोना दूर रहे, इसके लिए दूध और हल्दी के सेवन की सलाह दी जा रही है। प्राणायाम और योग करने को कहा जा रहा है। आयुर्वेद नुस्खे लेने की सलाह दी जा रही है। आयुर्वेद बीमारी के इलाज के साथ ही शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। हाल ही में मैंने पढ़ा कि हमारे संस्कार और आहार को लेकर दुनिया मे रिसर्च हुई। रिसर्च में पाया गया कि हमारे यहां पेट की बीमारी दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है। दुनिया के बड़े-बड़े डॉक्टरों ने मान लिया है कि पौष्टिक, साधारण और ताजा भोजन करने के कारण भारतीयों को पेट की बीमारी कम होती हैं। पेट की बीमारी कम होने के कारण ही हमारे यहां कोरोना का असर ज्यादा नहीं हो पा रहा है। आप भी पढ़ रहे होंगे कि मरीजों में कोरोनो के लक्षण न होने के बावजूद उनमें संक्रमण पाया गया। कुछ लोग जांच किट में दोष बता रहे हैं पर असल में चिकित्सकों ने जो पाया वह हमारे लिए राहत की बात है। डॉक्टरों का मानना है कि भारतीयों में प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होने के कारण बीमारी पूरी तरह असर नहीं दिखा पाई। इसी कारण हमारे देश में एक चौथाई मरीज ठीक हो रहे हैं। बडी संख्या में क्वारंटाइन किए गए लोग भी तेजी से सही हुए। इससे पहले चीन ने भारतीय परम्परा के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीजों के जलाने का आदेश दिया था। हमारे यहां माना जाता है कि अग्नि से वायु में विद्यमान विषाणु मर जाते हैं। हमारे वेद और उपनिषदों में इस बारे में विस्तार से बताया गया है। चीन जैसे देश को भी आखिर हमारी परम्परा पर चलना ही पड़ा है।

आयुर्वेद के चमत्कार और महत्ता के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आयुष मंत्रालय ने कोविड-19 का उपचार खोजने के लिए टॉस्क फोर्स का गठन किया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद भी रिसर्च कर रहा है। कोरोना के उपचार के लिए बड़ी संख्या में दवा बनाने के दावे भी सामने आए हैं। सरकार फिलहाल उनकी प्रमाणिकता का पता लगा रही है। केरल में इस दवा का ट्रायल भी प्रारम्भ हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत में कोरोना काल में एक नई छाप छोड़ी है। भारतीय संस्कृति, हमारी चिकित्सा पद्धति, भारतीय खानखान, हमारे मसालों की दुनियाभर में तेजी से चर्चा हो रही है। आयुर्वेद और मसालों का बाजार बढ़ रहा है। हमारी देशी चिकित्सा की तरफ दुनियाभर के लोग रुख कर रहे हैं। भारत के विश्वगुरु बनने की तरफ यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

मिसाल बन गए हैं संघ के सेवा कार्य

बाल्यकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक बनने के बाद मैंने बहुत बार देखा है कि आपदा-विपत्ति के समय कैसे स्वयंसेवक चुपचाप राहत कार्य करते रहे हैं। संघ और अनुषांगिक संगठनों के बिना प्रचार कार्य करने का लंबा इतिहास है। सूचना मिलते ही स्वयंसेवक घरों से निकलते हैं और कार्यों में जुट जाते हैं। कोई भी कार्य हो, तुरंत योजना बनाकर संगठित तरीके से कार्य किया जाता है, इसका प्रभाव पर मेरे पर हमेशा रहा। कोरोना महामारी के प्रकोप में जिस तरह भारत ही नहीं पूरी दुनिया में संघ के स्वयंसेवक कार्य रहे हैं, प्रशंसनीय है और अनुकरणीय भी है। माननीय सर संघचालक डा.मोहन भागवत ने हाल ही में स्वयंसेवकों को कोरोना काल में जरूरतमंदों को बिना भेदभाव मदद करने के लिए प्रेरित भी किया। उन्होने कहा कि ये हमारा समाज है, ये हमारा देश है, इसलिए काम कर रहे हैं। कुछ बातें सभी के लिए स्पष्ट है। नई बीमारी है, इसलिए सबकुछ पता नहीं है। ऐसे में अनुमति लेकर, सावधानी बरतकर काम करें। थकना नहीं चाहिए, प्रयास करते रहना चाहिए। स्वयंसेवकों के लिए भागवतजी के संबोधन का सबसे बड़ा मंत्र रहा, हम कार्यक्रम के लिए कार्य नहीं करते हैं। कार्य के लिए कार्यक्रम करते हैं।

संघ के आलोचकों को कई बार हम कहते हैं कि संघ को पहचानना है तो अंदर आइये और देखिये। कोरोना के आपदाकाल में तो यह भी कहने की जरूरत नहीं है। किसी को संघ को पहचानना है, तो संघ के स्वयंसेवकों के कार्य देखने हैं या कहिये कि संघ का चरित्र देखना है कि आपदाकाल में गरीब बस्तियों, स्लम बस्तियों और अन्य स्थानों पर संघ स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे कार्यों को देख लें। संघ के स्वयंसेवक अपनी-अपनी क्षमता अनुसार एक चिकित्सक के तौर पर, रक्त की कमी तो एक रक्तदाता के तौर पर, एक अनुशासित सिपाही की तरह भीड़ को लॉकडाउन के पालन के लिए पंक्तिबद्ध करता दिखाई देगा। कार्य भी उस तरह की किसी को कोई शिकायत न हो।

कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण संघ ने पूरे देश में कई कार्यक्रम स्थगित किए। नव संवत पर पूरे देश में एकत्रीकरण के कार्यक्रम स्थगित किए गए। विश्व हिन्दू परिषद ने श्रीराम नवमी उत्सव पर पूरे देश में बृहत स्तर पर होने वाली शोभायात्राओं का तो पूरी तैयारी होने के बावजूद स्थगित किया। इसी तरह अन्य संगठनों ने कार्यक्रम स्थगित किए। इन सबका एक ही उद्देश्य रहा कि लॉकडाउन के दौरान अनुशासन बना रहे। लॉकडाउन का पालन करते हुए संघ के तीन लाख से ज्यादा स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा संघ, संघ के अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ता, संघ के स्वयंसेवक अपने-अपने माध्यम से जनसेवा में जुटे हैं। जरूरतमंदों को खाना खिलाया जा रहा है। बेघरों के लिए आवास के लिए व्यवस्था की गई है। बीमारों के लिए दवा और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले सप्ताह तक देश के 55,725 स्थानों पर संघ द्वारा अब तक सवा दो करोड़ भोजन के पैकेट बांटे गए। सबसे अधिक सेवा कार्य उत्तर प्रदेश में 7013 स्थानों पर , मध्यप्रदेश में 5781, गुजरात में 4,561, महाराष्ट्र व गोवा में 4,460 स्थानों पर किया जा रहा है। 35 लाख से ज्यादा लोगों को राशन किट दिए गए। पौने चार लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को सहायता दी गई। यह कार्य अभी निरंतर चल रहा है।

कुछ दिन पहले जनधन योजना के तहत जगह-जगह बैंकों से धनराशि निकालने के लिए लोगों की भीड़ लग गई थी। शारीरिक दूरी का नियम टूटने लगे थे। इससे संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया था। ऐसे में यह खबर आते ही ग्रामीण इलाकों समेत तमाम स्थानों पर संघ स्वयंसेवकों ने लोगों को शारीरिक दूरी बनाते हुए पंक्तियां बनाने में सहयोग दिया। बैंक के स्टाफ को ऐसे में अपनी ड्यूटी निभाने में बहुत सहयोग मिला। कोरोना के कारण बैंकों में कम स्टॉफ रहने के बावजूद सभी लोगों को धनराशि देने में सुविधा हुई। इस कार्य के लिए संघ स्वयंसेवकों की प्रशंसा भी की गई। दूरस्थ ग्रामीण इलाके, जनजातीय और वन क्षेत्रों में सामान न पहुंचने पर स्वयंसेवकों ने राशन किट पहुंचाई। कई स्थानों पर इस कार्य में सरकारी कर्मचारियों का सहयोग दिया। ग्रामीण क्षेत्र में किसानों के उत्पाद फल और सब्जी शहरों और मंडियों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई। सब्जियों की उचित बिक्री हो, इसके लिए भी सहयोग दिया गया।

महामारी के कारण अनेक स्थानों पर अस्पतालों में रक्त की कमी हो गई। ब्लड बैंक खाली हो गए। इस सूचना पर स्वयंसेवकों द्वारा दूसरों की जान बचाने के लिए 13, 562 यूनिट रक्तदान किया गया है। यह पिछले सप्ताह के आंकड़े हैं। अभी कई स्थानों पर स्वयंसेवक रक्त की कमी न हो, इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही लॉकडाउन के पालन और लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए 30 लाख से ज्यादा मॉस्क बांटे । मजदूरों और बेघरों के रहने के लिए दस हजार से ज्यादा आवास की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। इस आपदा में काल घूमंतू लोगों के सामने बड़ा संकट उत्पन्न हो गया। 77,545 घुमंतू लोगों को स्वयंसेवकों ने सहायता उपलब्ध कराई। देश में अनुषांगिक संगठनों के चल रहे सेवा प्रकल्पों से माध्यम से भी जरूरतमंदों की सहायता की जा रही है।

देश के साथ ही विदेशों में कई स्थानों पर अनुषांगिक संगठन सेवा इंटरनेशनल कार्य कर रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, केन्या व मलेशिया के साथ ही नेपाल, श्रीलंका व म्यांमार आदि देशों में संघ स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं। कई स्थानों पर हेल्पलाइन बनाकर सहायता दी जा रही है। कई स्थानों पर फंसे भारतीय छात्रों की सहायता की गई।

कोरोना से जीतेंगे जंग, अपनी संस्कृति के संग

कोरोना महामारी के प्रकोप से बचाने के लिए जारी लॉकडाउन तो अगले महीने 3 मई को समाप्त हो जाएगा, पर ध्यान रखिये कोरोना वायरस खत्म नहीं होगा। हमें कोरोना के साथ जीने की शैली अपनानी होगी। कैसे जिया जाए, यह हमारी भारतीय संस्कृति और परम्परा में है। लॉकडाउन की समाप्ति के साथ फिर से थमी हुई दुनिया तेज रफ्तार से पटरी पर दौड़ने लगेगी। बदली हुई परिस्थितियों में सब कुछ पहले जैसा नहीं होगा। ऐसा न हो कि भागदौड़ में जिंदगी की पटरी से हमारी गाड़ी ही उतर जाए। सरकार की तरफ से लगाई गई पाबंदियों के बीच हमें खुद अपने को संयम में रखकर महामारी से यह जंग जीतनी होगी। सामाजिक सरोकार बनाते हुए हमें शारीरिक दूरी का पालन करना होगा। कोरोना वायरस को लेकर रिसर्च में जुटे वैज्ञानिकों ने पाया है कि महामारी का प्रकोप अभी थमेगा, पर पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। यह भी आशंका जताई गई है कि अमेरिका में सर्दियों में एक बार फिर से कोरोना वायरस तांडव मचा सकता है। ऐसे में अमेरिका में कई पाबंदिया घोषित की जा रही हैं।
कोरोना वायरस का प्रभाव हमारे स्वास्थ्य क्षेत्र और आर्थिक संसाधनों पर भारी संकट लेकर आया है। महामारी के प्रकोप से देशवासियों को बचाने के उपायों को लेकर हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में महानायक बनकर उभरे हैं। दुनिया के सभी देशों के मुखियाओं समेत हर क्षेत्र की हस्तियां उनकी प्रशंसा कर रही हैं। उनके यह उद्गार कि जान भी बचानी है, और जहान भी, ने हमें युद्ध से भी बड़ी इस आपदा पर विजय करने की शक्ति दी है। हमारी भारतीय संस्कृति में पहले भी ऐसी आपदाओं से निपटने की बहुत ही समृद्ध परम्परा रही है। हम अपनी संस्कृति का अनुसरण करते हुए इस आपदा से बच सकते हैं।
हमारे यहां सभी घरों में प्रवेश द्वार पर ही जूते-चप्पल उतारने का नियम रहा है। आज विश्व के तमाम बड़े वैज्ञानिक यह बता रहे हैं कि जूते-चप्पल घर के बाहर रखें। घर में घुसते ही हाथों को धोये। कोरोना से बचाव के लिए मुहं पर मॉस्क पहने। मॉस्क मिलने में समस्या है तो गमझा, साफी, रूमाल आदि डाल सकते हैं। कई राज्यों में आज भी लोग गमछा, दुपट्टा अन्य प्रचलित कपड़ा गले में डालते हैं। सर्दी और गर्मी से बचाव के लिए इसका प्रयोग होता है। हम इसे बाहर निकलते समय मुहं पर बांधें रखे। अपने साथ सेनेटाइजर साथ रखें। आजकल यह हर जगह उपलब्ध है। गांवों में जहां सेनेटाइजर उपलब्ध नहीं है वहां साबुन का इस्तेमाल करें। साथ ही नीम की पत्तियां पानी में उबालकर रखे। यह पानी भी हाथ धोने के लिए उत्तम है।
महामारी के प्रकोप से बचाने के लिए एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने को कहा जा रहा है। हमारे यहां प्रणाम करने का रिवाज है। आज वैज्ञानिक भी दुनिया को दूर से ही नमस्कार करने का संदेश दे रहे हैं। सभी देशों में लोग इसका पालन भी कर रहे हैं। इसके साथ ही सबसे बड़ा संदेश यह भी मिला है कि घर में ही बना खाना खाएं और बच्चों को खिलाएं। जंक फूड स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। बीमारी से बचाव के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लें।
लॉकडाउन में जारी पाबंदियों में कुछ समय के बाद छूट भी मिलेगी। अभी पिछले एक महीने से लोग घरों से काम कर रहे हैं। कार्यालय, उद्योग, परिवहन समेत कई सेवाएं बंद हैं। छूट के बाद फिर से कामकाज शुरु होगा। यह ध्यान देने की बात है कि जहां तक जरूरी हो उन्हीं क्षेत्रों में लोगों को काम पर बुलाया जाए। जो लोग घरों से अपना काम कर सकते हैं, उनसे घरों से काम लिया जाए। महानगरों में पहले जैसी भीड़ उमड़ने के बाद शारीरिक दूरी का नियम टूटने का खतरा है। ऐसे में मुहं पर मॉस्क लगाने और हाथ न मिलाने के बावजूद लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। महामारी से जूझने के कारण हमारे स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारी दवाब है। हर तरफ से कर्मचारियों में कटौती के साथ उनके वेतन में भी कटौती के समाचार आ रहे हैं। निश्चित तौर पर आर्थिक संकट का सामना भी हमें करना पड़ेगा। लॉकडाउन के दौरान हमनें सीमित साधनों के साथ दिन काटे हैं। साधारण खाना खा रहे हैं। घरों में रहने के कारण परिवहन पर आने वाला खर्च भी बचा है।
लॉकडाउन के पश्चात भारतीय संस्कृति के अनुसार हम किसी के घर भी जाएं या कोई हमारे घर आए तो सबसे पहले जूते बाहर रखे जाएं। सेनेटाइजर से हाथ धोये। जिस घर गए हैं, उनसे पूछे कि क्या आपके यहां नियमित रूप से सेनेटाइजर या साबुन से हाथ धोये जा रहे हैं या नहीं। लोगों को मुहं पर मॉस्क पर बांधन के लिए प्रेरित करें। इस तरह हम कोरोना महामारी के प्रकोप के बच सकते हैं और अन्यों को बचा सकते हैं।

अखंड राष्ट्र के प्रबल समर्थक बाबा साहब

पिछले लंबे समय से बाबा साहब डा.भीमराव अम्बेडकर का नाम लेकर कुछ लोग देश की एकता और अंखडता को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। हैरानी की बात है कि मुसलमान और कम्युनिस्ट नेता भी बाबा साहब के आदर्शों पर चलने का दावा करते हुए हिन्दू समाज की आलोचना कर रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून 2019 के विरोध में जिस तरह दलित और मुस्लिम गठजोड़ दिखाने की कोशिश की गई, वास्तव में वह बाबा साहब की मुस्लिमों के बारे असली सोच के विरोध में था। बाबा साहब का नाम लेकर ही उनके विचारों का खत्म करने का प्रयत्न किया गया। बाबा साहब ने कभी हिन्दू धर्म का विरोध नहीं किया। बाबा साहब हिन्दू धर्म में जातिगत आधार पर भेदभाव के विरोधी थे। बाबा साहब समाज में समानता के प्रबल समर्थक थे। बाबा साहब राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रबल समर्थक थे। बाबा साहब ने गुलाम प्रथा के लिए इस्लाम को दोषी ठहराया था। उनका मानना था कि इस्लाम के कारण ही गुलामी की प्रथा लंबे समय तक कायम रही। इस्लाम के कारण ही भारत को कई बार परतंत्र होना पड़ा। इसी कारण उन्होंने देश के बंटवारे और आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का लागू करने का विरोध किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों का विरोध करने के लिए मुस्लिम नेता और कम्युनिस्ट बाबा साहब को अपना आदर्श बताते हैं। बाबा साहब मुस्लिमों के बारे कहते थे कि मुस्लिम महजब और कुरान के प्रति वफादरी रखते हैं। बाबा साहब ने कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का विरोध किया था। इसी कारण कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा चुनाव नहीं जीतने दिया। बाबा साहब और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के संबंध इसी कारण कभी अच्छे नहीं रहे। पंडित नेहरू ने पहले 1952 में हुए आम चुनाव में उत्तर मुंबई लोकसभा सीट से बाबा साहब को हराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। बाबा साहब के पुराने नजदीकी साथी एनएस काजोलकर को कांग्रेस ने उनके सामने खड़ा किया था। नेहरू ने दो बार बाबा साहब के विरोध में जाकर वोट मांगे। चुनाव में बाबा साहब 15 हजार वोट से हार गए। इसके बाद 1954 में बंडारा लोकसभा चुनाव के उपचुनाव में कांग्रेस ने फिर हराने का काम किया। मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का विरोध करने के कारण कांग्रेस ने कभी बाबा साहब की नीतियों और विचारों का सम्मान नहीं किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बाबा साहब में कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीतियों का विरोध करने में समानता नहीं थी। बाबा साहब भी संघ की तरह देश के विभाजन के खिलाफ थे। संघ ने समाज को जातिविहीन व्यवस्था के आधार पर जोड़ते हुए राष्ट्रीय एकता और अखंडता का कल्पना को साकार किया। संघ के संस्थापक डा.केशवराव बलिराम हेडगेवार कहते थे कि शाखा में आने वाला केवल स्वयंसेवक है। द्वितीय सरसंघचालक गुरु गोलवलकर जी ने स्वयंसेवकों को अन्तरजातीय विवाह करने के लिए प्रेरणा दी। गुरुजी ने 1942 संघ के एक स्वयंसेवक के परिवार में अंतरजातीय विवाह की सराहना की थी। जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 हटाने का बहुजन समाज पार्टी यह कहते हुए समर्थन देती है कि बाबा साहब इस व्यवस्था के खिलाफ थे। बाबा साहब ने अखंड राष्ट्र का पुरजोर समर्थन किया था। बाबा साहब ने “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया” बुक में मुस्लिमों के बारे में बेबाकी से विचार प्रस्तुत किए हैं। उऩ्होंने लिखा है कि इस्लाम मुस्लिम और गैर—मुस्लिमों भेद करता है। इस्लाम का बंधुत्व मानवता का सार्वभौम बंधुत्व नहीं है। यह बंधुत्व केवल मुसलमान का मुसलमान के प्रति है। दूसरे शब्दों में कहें तो इस्लाम कभी एक सच्चे मुसलमान को ऐसी अनुमति नहीं देगा कि आप भारत को अपनी मातृभूमि मानो और किसी हिंदू को अपना आत्मीय बंधु। किताब के 301 पन्ने पर लिखा है कि विभाजन के बाद भी अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक की समस्या बनी ही रहेगी। यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि पाकिस्तान बनने से हिन्दुस्तान साम्प्रदायिक समस्या से मुक्त नहीं हो जाएगा। सीमाओं का पुनर्निर्धारण करके पाकिस्तान को तो एक सजातीय देश बनाया जा सकता है, परन्तु हिन्दुस्तान तो एक मिश्रित देश बना ही रहेगा। मुसलमान समूचे हिन्दुस्तान में छितरे हुए हैं-यद्यपि वे मुख्यतः शहरों और कस्बों में केंद्रित हैं।

कोरोना से मुकाबला-विश्वमंच पर छाए मोदी

कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से बचाव और उपचार के लिए विश्वभर की निगाहें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों और उठाये गए कदमों पर लगी हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पहले 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद 24 मार्च की रात से 21 दिन के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के कारण देश की जनता महामारी के प्रकोप का मुकाबला करने को तैयार हो गई। प्रधानमंत्री के प्रयासों की दुनियाभर में तारीफ हो रही है और मीडिया में कहा जा रहा रहा है कि भारत की जनता अगर सरकारी प्रतिबंधों का कड़ाई का पालन से करें तो देश में ज्यादा जान गंवाएं बिना लोगों को ज्यादा तादाद में संक्रमित होने से बचाया जा सकता है। केंद्र और राज्य सरकारों के निर्देशों और लॉकडाउन का पालन करने से हम न केवल स्वयं को बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को महामारी के प्रकोप से बचा सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर पूरे देश में लागू लॉकडाउन के कारण हमारे 431 जिले अभी पूरी तरह संक्रमण मुक्त हैं। जिन 133 जिलों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज हैं, वहां कुछ इलाकों को ही हॉटस्पॉट माना गया है। इतना माना जा सकता है कि मोदी के उठाये कदमो के कारण महामारी के फैलने पर रोक लगी है। साथ ही दवा और अन्य सामान के लिए दुनियाभर की उम्मीदें भारत पर टिकी हुई हैं। संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के देशों को हर तरह की उम्मीद बंधाई है।

हमारे सामने चीन और अमेरिका जैसे महाबली देशों की सरकारों का उदाहरण सामने हैं। मीडिया में चर्चा आई कि चीन ने महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए संक्रमित नागरिकों पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया। चीन में लाखों लोगों का कोई सुराग नहीं मिल रहा है। 80 लाख से ज्यादा मोबाइल सिम का पता नहीं चल पा रहा है। ढाई करोड़ लोगों के मोबाइल फोन बंद बताएं जा रहे हैं। यह हाल है साम्यवाद की राह पर चलने वाली चीनी सरकार का। दुनियाभर में अब तक कोरोना वायरस के कारण 90 हजार के आसपास लोगों की जानें जा चुकी हैं। अमेरिका में 15000 के आसपास आंकड़ा पहुंचने वाला है। अमेरिका में 4.30 लाख कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनता को बचाने में नाकामी की हताशा में विश्व स्वास्थ्य संगठन पर ही आरोप लगा दिए। डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर लापरवाह होने और चीन पर खास ध्यान देने का आरोप लगाया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेडरोस ने भी चेतावनी दी है कि अगर हम नहीं सुधरे, तो हमारे सामने और ज्यादा ताबूत रखे होंगे। लाशों का ढेर लग जाएगा। पाकिस्तान की सरकार ने जनता को बचाने के उपाय करने के बजाय मरने वालों के लिए 80 एकड़ जमीन दफनाने के लिए आरक्षित कर दी है।

हमारे देश में अभी चीन, अमेरिका, इटली, फ्रांस आदि देशों जैसीं सुविधाएं नहीं है। हमारे दूरदर्शी प्रधानमंत्री मोदी ने एक कुशल प्रशासक और बेहतर संरक्षक की भूमिका निभाते हुए देशवासियों को संकट से बचाने के लिए घरों में रहने की अपील की। सही समय पर लॉकडाउन की घोषणा करके लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए घरों रहने की अपील की गई। देश की जनता ने भी अपने प्रधानमंत्री की अपील पर चैत्र नवरात्र के दौरान घरों में रहकर की मां दुर्गा की आराधना की। यह ऐसा अवसर होता है कि जब करोड़ों लोग स्थानीय स्तर पर लगने वाले मेलों में पहुंचते हैं। देश की जनता ने प्रधानमंत्री की अपील के मद्देनजर पहले रामनवमी और फिर हनुमान जयंती पर कोई आय़ोजन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या में विवादित भूमि पर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का निर्णय देने के बाद तमाम संगठनों व्यापक स्तर पर कार्यक्रम करने की तैयारी कर रखी थी। विश्व हिन्दू परिषद ने प्रधानमंत्री की अपील पर अपनी पहले की तैयारियों की विराम देते हुए कार्यक्रम स्थगित कर दिया और कुछ गिने-चुने लोगों ने ही भगवान श्रीराम का प्राक्टयोत्सव मनाया। पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भव्य शोभायात्राओं का आयोजन होना था। प्रसन्नता की महामारी से प्रकोप से बचाने के लिए कहीं कोई कार्यक्रम नहीं किया गया। इसके लिए सभी लोगों का साधुवाद। यह भी सही है कि तबलीगी जमात जैसी घटना नहीं होती तो संक्रमण को काबू करने में ज्यादा आसानी होती। दुख की बात यह है कि राज्य सरकारों की चेतावनी के बावजूद तबलीगी जमात के लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। देश में कोई भूखा न सोय़े, प्रधानमंत्री की इस अपील पर सामान्य वर्ग ने खुलकर सहयोग दिया। प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के प्रकोप से बचाने के लिए विदेशी नेताओं से भी बात की। लॉकडाउन के मुद्दे पर वीडियो कांफ्रेस के जरिये सभी दलों के नेताओं से बात की और अब मुख्यमंत्रियों से बात करके लॉकडाउन जारी रखने या समाप्त करने का फैसला होगा। वैसे तो ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री लॉकडाउन को जारी रखने के पक्ष में हैं। कुछ राज्यों ने लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा भी कर दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी जो शुरुआत में कोरोना महामारी को सीएए और एनआरसी के मुद्दे से ध्यान हटाने का शुगूफा बता रही थी, आज उन्हें लॉकडाउन कराने के लिए सड़कों पर उतारना पड़ा है। कोरोना महामारी के प्रकोप से बचने का एकमात्र उपाय है, घर में रहे और अपने हाथों को साफ रखे। यह तो तय है कि कई राज्यों में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई जाएगी। ऐसे समय में हम सभी को प्रशासन, पुलिस और डॉक्टरों का सहयोग करना है। हम सब प्रशासन के नियमों और निर्देशों का पालन करें। ऐसे समय में हमारा सहयोग बहुमूल्य होगा।

कोरोना महामारी से बचाव और चैत्र नवरात्र में साधना पर विशेष लेख

घर में करें मां भगवती की साधना – कैलाश विजयवर्गीय

आप सभी को 25 मार्च 2020 से प्रारम्भ होने वाले विक्रम संवत 2077 पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। इस वर्ष आप सभी स्वस्थ रहे और भारत की प्रगति में सहयोगी बने। 2077 संवत को प्रमादी बताया गया है। प्रमादी संवत के प्रभाव से कृषि और व्यापारिक क्षेत्र में विकास देखने को मिल सकता है। इस संवत के राजा बुध होंगे और मंत्री चंद्रमा होंगे। इसी दिन से चैत्र नवरात प्रारम्भ हो रहा है। नवरात देवी उपासना का अवसर है।

पूरे विश्व में कोरोना महामारी के प्रकोप से हाहाकार मचा हुआ है। 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में जनता कर्फ्यू को भरपूर समर्थन मिला। बीमारी के बढ़ते प्रकोप के कारण को कई जिलों लॉक डाउन लागू किया गया। पंजाबं लॉक डाउन में लोगों की आवाजाही बंद न होने पर कर्फ्यू लगा दिया है। दिल्ली में लॉक डाउन में केवल आवश्यक सेवाओं की अनुमति दी गई है। उत्तर प्रदेश में भी सीमाओं को बंद कर दिया गया है। सरकार के तमाम कदमों के बावजूद महामारी प्रकोप से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसकी वजह है कि लोग सरकार द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। आप सभी से अपील है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए प्रतिबंधों का पालन करें। यह आपके और आपके परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

महामारी के प्रकोप के दौरान हमें देवी उपासना और भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाने का अवसर मिल रहा है। नवरात के दिनों में हम सब अपने-अपने घरों में कलश स्थापना करें और देवी के नौ रूपों की नौ दिन आराधना करें। देवी को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ और हवन की विशेष परम्परा रही है। धर्म ग्रंथ एवं पुराणों के अनुसार नवरात मां दुर्गा की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। नवरात्र तीन देवियों महाकाली (शौर्य की देवी), महालक्ष्मी (धन की देवी) तथा महासरस्वती (ज्ञान की देवी) को समर्पित है। महामारी के प्रकोप से बचाने के लिए

रोगानशेषानपहंसि शुष्य रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रितानां हाश्रयतां प्रयान्ति।।

कार्यों में आने वाली बाधाओं के निवारण के लिए मंत्र है
सर्व मंगल्य मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।।

विश्व में शांति के लिए मंत्र जाप करें

रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्ड विनाशिनी।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विशो जहि।।

नवरात में मां भगवती के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी l तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ll पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च l सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ll नवमं सिद्धि दात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः l

पहले नवरात को देवी शैलपुत्री का पूजन किया जात है। मंत्र है

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ मंत्र से प्रार्थना करें।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्तुति करें।

दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र है।

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

प्रार्थना मंत्र है

दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

स्तुति मंत्र है

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

तीसरे दिन देवी चंद्रघण्टा की पूजा करें और पूजा मंत्र है

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

प्रार्थना मंत्र है

पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

स्तुति मंत्र हैं

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

चौथे दिन देवी कूष्माण्डा की

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥ मंत्र से आराधना करें।

प्रार्थना मंत्र है

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

पांचवे दिन देवी स्कन्दमाता की

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ मंत्र का जाप करते हुए आराधना करे। और

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ मंत्र से पूजन करें।

स्तुति मंत्र हैं

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

छठे दिन मां कात्यायनी की

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥ मंत्र के साथ आराधना की जाती है।

प्रार्थना मंत्र है

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

सातवें दिन देवी कालरात्रि की आराधना की जाती है।

पूजा मंत्र है

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।

लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥

वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।

वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥ के साथ पूजन करें और

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ के साथ स्तुति करें।

आठवें दिन देवी महागौरी का पूजन किया जाता है और मंत्र है

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

प्रार्थना

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

नवरात के अंतिम और नवें दिन

माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

पूजा मंत्र है

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

प्रार्थना

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इसके अलावा नवरात में दुर्गा सप्तशती के पाठ करने की परम्परा रही है। अगर हम सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते हैं दुर्गा कवच और अर्गला स्त्रोत का पाठ नौ दिन तक अवश्य करें। मां भगवती निश्चय ही आपकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर आपकी मनोकामनाओं को पूरी करेंगी।

नवरात के दिनों में रामचरित मानस का पाठ करने से हमें सुख, समृद्धि और शांति मिलती है। परिवार में खुशहाली आती है और एकता बनी रहती है। रामचरित मानस का पाठ हम परिवार के सदस्य अलग-अलग 24 घंटें में कर सकते हैं। इस बार अच्छा होगा कि रामचरित मानस में दिए गए निर्देश के अनुसार नौ दिन तक रामचरित मानस का पाठ करें। नवरात में दुर्गा सप्तशती के साथ हनुमान जी की आराधना करना भी शुभ माना जाता है।

कोरोना महामारी के प्रकोप से खुद और परिवार को बचाने के लिए आवश्यक है इस बार नवरात पर सरकार द्वारा दिए निर्देश के अऩुसार मंदिर बंद रहेंगे। सभी लोग अपने-अपने घरों में ही स्थापित मां दुर्गा की आराधना करें। मां के भजन गाए और कीर्तन करें। यूटयूब पर मां भगवती के भजन सुने। नवरात में मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए साधना का विधान है। कोरोना महामारी से बचने के लिए आवश्यक है कि अपने घऱ में स्नान करके ही मां भगवती की साधना करें। यह भी ध्यान रखना है कि इस बार भूखे रहकर साधना नहीं करनी है। आप चाहे अन्न ग्रहण न करें पर शरीर को ताकत देने वाले और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले पदार्थ अवश्य ग्रहण करें। अंजीर, काजू, बादाम, अखरोट और खजूर प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करते हैं। स्वयं घरों में रहे और दूसरों को भी घरों में रहकर मां दुर्गा की साधना करने को कहें।

जैसा कि मैंने प्रारम्भ में कहा कि देवी को प्रसन्न करने के लिए हवन और यज्ञ करने की परम्परा रही है। प्राचीन काल में पशुबलि देने की परम्परा को अब बंद कर दिया गया है। नवरात के दिनों में हवन करने से घर में पवित्रता आती है और हमारे अंदर ऊर्जा भरती है। हम सबके लिए यह बहुत बड़ा अवसर है कि हम लोगों घरों में रहकर यज्ञ, हवन और ईश्वर की आराधना करें। विश्व कल्याण की भावना को लेकर भारत में वैदिक युग से यज्ञ करने की प्राचीन समृद्ध परम्परा रही है। यज्ञ में मंत्रोच्चार के अंत में स्वाहा के साथ ही आहुति देते ही उठती अग्नि हमारें अंदर सांस के माध्यम से तमाम रोगों से बचाती है। यज्ञ केवल कर्मकांड ही नहीं है बल्कि एक पूरी रोगों के उपचार की वैज्ञानिक पद्धति है। यज्ञ की उठती लपटें हमें जीवन में सत्य के पथ पर चलते हुए संकल्प की सिद्धि का मार्ग बताती है। यज्ञ में आहुति के लिए विभिन्न प्रकार की औषधियों के साथ गो के घी का उपयोग किया जाता है। कपूर जलाने से तमाम तरह का संक्रमण दूर होता है। यज्ञ से वातारवण में विद्यान दूषित तत्व समाप्त होते हैं और मनोरम तथा स्वस्छ वातावरण उत्त्पन्न होता है। श्रीराम शर्मा द्वारा स्थापित ब्रह्मवर्चस संस्थान वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया गया है कि यज्ञ से उत्पन्न धुआं सौ प्रतिशत आक्सीजन उत्पन्न कतरता है। अग्नि के माध्यम ईश्वर की उपासना की प्रक्रिया यज्ञ है।

ऋग्वेद में वर्णन है यज्ञं जनयन्त सूरयः। अर्थ हे विद्वानों! संसार में यज्ञ का प्रचार करो। अथर्ववेद में बताया गया है कि यज्ञ ही समस्त विश्व-ब्रह्मांड का मूल केंद्र है। अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभिः। शतपथ ब्राह्मण में यज्ञ को देवों की आत्मा कहा गया है। यज्ञो वै देवानामात्मा। यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म बताया गया है। यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म। ‘यज्ञ’ शब्द पाणिनीसूत्र ‘‘यजयाचयतविच उप्रक्चरक्षो नड़्’’ में नड़् प्रत्यय लगाने पर बनता है। यज्ञ शब्द ‘यज्’ धातु से बना है। आज यज्ञ और हवन की महत्ता और महिमा समझने की आवश्यकता है। प्राचीन काल में संकटों से मुक्ति का मार्ग खोजने के लिए यज्ञ की परम्परा रही है। संकट से उबरने में जब कोई उपाय सफल नहीं होता तो ऋषि-मुनियों के द्वारा यज्ञ का आयोजन किया जाता था। वेदों में बताया गया है कि सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए यज्ञ करें। भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवत गीता में अर्जुन को यज्ञ का महत्व बताया था। भगवान कहते हैं कि हे अर्जुन! जो यज्ञ नहीं करते हैं, उनको परलोक तो दूर यह लोक भी प्राप्त नहीं होता है।

रोगों के उपचार में गोली लेना, इंजेक्शन लगवाना और सर्जरी आदि मुख्य साधन है। यज्ञ में श्वांस के माध्यम से बिना चीरफाड़, इंजेक्शन और औषधि के बिना उपचार होता है। संक्रमण होने पर श्वांस के माध्यम से रोगियों का उपचार होता है। इसे भैषज्य यज्ञ कहते हैं। भैषज्य यज्ञ शरीर में बल बढ़ाता है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए ऋषि-मुनि यज्ञ करते थे। आज भी कई इलाकों में महिलाएं अपने बच्चों पर आने वाली बलाओं से बचाने के लिए अग्नि में एक-दो मिर्च डालती है। अगर भारी मात्रा में मिर्च अग्नि में डाली जाए तो वातावरण विषैला हो जाता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यज्ञ में आम और चंदन की लकड़ी. हवन सामग्री, घी, औषधियों की आहुति से वातावरण पवित्र होता है। यज्ञ से पवित्र वातावरण होने से हमें रोगों से मुक्ति मिलती है। अगर यज्ञ करना संभव नहीं है तो गाय के उपला जलाकर घी, गुग्गल, लोबान, लौंग आदि की आहुति देकर भी रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही प्रार्थना करें

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्।

ॐ शांतिः शांतिः शांतिः

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर आह्वान, आइए हिंदुस्तान का दिल देखिए

मध्यप्रदेश की स्थापना 1 नवम्बर 1956 में हुई थी। प्रदेश ने आज अपने आधुनिक स्वरुप के 63 वर्ष पूरे कर लिए। मध्य प्रदेश सही मायनों में भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के सम्मिश्रण का केंद्र है। मध्य प्रदेश भारत के बीचों बीच विराजमान ही नहीं है, अपितु एक सशक्त एवं एकीकृत भारत का उदाहरण भी है। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हम सभी को अपने देश के विषय में अधिक से अधिक जानकारी बटोरने का अनुरोध किया था। इस के पश्चात् मैंने सोशल मीडिया के द्वारा #Dekho_Bharat एवं #देखो_भारत नाम से एक प्रयास किया था कि भारत के प्रसिद्ध एवं प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों के विषय में पूरे देश को अवगत कराया जाए। मैंने मध्यप्रदेश के भी एतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के बारे में लिखा था ‘ये सभी स्थल किसी भी पुरातत्व एवं इतिहास प्रेमी के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं।’    आज पूरा देश राम जन्मभूमि के विषय में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर आज ये उचित होगा कि हम भगवान श्रीराम से जुड़े मध्य प्रदेश के ऐसे ही प्राचीन स्थलों का स्मरण करें। भगवान श्रीराम की जीवनी पर आधारित एक पर्यटन पथ का यदि निर्माण किया जाये तो उसमें मध्य प्रदेश की बहुत बड़ी भूमिका होगी। ऐसा संकल्प माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी के स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक तो होगा ही, हमारी नयी पीढ़ी को हमारे इतिहास एवं धार्मिक जड़ों से भी जोड़ेगा।
जब भगवान श्रीराम वनवास के लिए प्रस्थान हुए, तो उनके पहले पड़ावों में से एक था चित्रकूट। श्रीराम ने यहां बहुत समय व्यतीत किया। वाल्मीकि रामायण में चित्रकूट का सन्दर्भ बहुत विशिष्ठ रूप से आता है। ऐसा कहते हैं कि श्रीराम ने जब अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध किया तो अनेकानेक ऋषि मुनि उस कार्यक्रम में चित्रकूट में सम्मिलित हुए। चित्रकूट में ही राम भरत मिलाप का मन को व्याकुल कर देने वाला वृतांत घटा। आज मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित रामघाट एवं जानकी कुंड श्रीराम एवं माँ सीता के द्वारा चित्रकूट में व्यतीत किए गए समय के साक्षी हैं।
भगवान श्रीराम ने इसके बाद दंडक वन के लिए प्रस्थान किया। आज की बात करें तो दंडकारण्य को हम बस्तर, छत्तीसगढ़ का भाग मानते हैं। रामायण काल में संभवतः यह वन पूरे मध्य भारत में फ़ैला हुआ रहा होगा। आज का छत्तीसगढ़ भी 1956 में मध्यप्रदेश का ही हिस्सा था। दंडक वन में ही श्रीराम के अनुज श्री लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पणखा की नाक काटी थी। कहा जाता है कि दंडक वन के पश्चात श्री राम ने विंध्य पर्वत एवं नर्मदा नदी के दूसरी ओर स्थित रामटेक में प्रवेश किया। लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसे और भी कई स्थान हैं जो हमें रामायण काल के बारे में अधिक सूचना देते हैं।
ऐसा ही एक स्थान है ओरछा। यहां आज भी भगवान श्रीराम की पूजा स्थानीय राजा के रूप में की जाती है। ओरछा में स्थित राम राजा मंदिर में श्रीराम पद्मासन मुद्रा में बैठे हैं। उनका बायां पैर उनके दाएं पैर के ऊपर है और उनके बाएं पैर के अंगूठे के दर्शन शुभ माने जाते हैं। प्रत्येक दिन श्रीराम के चरणों में चंदन का लेप अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु एवं पर्यटक बड़ी संख्या में ओरछा आते रहे हैं।
माना जाता है कि बुंदेल राजा मधुकर शाह जुदेव की रानी गणेश कुंवारी ने इस मंदिर की स्थापना की थी। सन 1575 में इस मदिर का निर्माण हुआ था। रानी गणेश कुंवारी श्रीराम की भक्त थीं। उन्होंने श्रीराम को बाल स्वरूप में ओरछा लाने के लिए अयोध्या में सरयू नदी के तट पर घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रभावित होकर श्रीराम रानी की गोदी में प्रकट हुए और रानी के साथ इस परिस्थिति में आने को तैयार हुए कि वे ओरछा के राजा बनेंगे। उसी समय से ओरछा राजघराने ने श्रीराम को ही ओरछा का वास्तविक राजा माना है। आज भी ओरछा में श्रीराम को एक राजा के समान सुरक्षा दी जाती है।
ऐसा ही एक अन्य स्थान है मुरैना। गुप्त एवं गुर्जर प्रतिहार युगों के मंदिरों के अवशेष आज भी मंदिरों की धरती मुरैना में पाए जाते हैं। इन्हीं मंदिर भवन समूहों में से एक है पढ़ावली। यहां के मंदिरों की भिन्तियों एवं छतों पर रामायण काल की कहानियों की दृश्यावली अंकित है। जब रावण ने माँ सीता का हरण कर उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बना दिया था, तब माँ सीता की देखभाल त्रिजटा नाम की एक राक्षसी ने की थी। त्रिजटा ने माँ सीता को रावण के क्रोध से भी बचाया था एवं श्री राम के संदेश भी माँ सीता तक पहुंचाए थे। उज्जैन में आज भी एक मंदिर में त्रिजटा की पूजा अर्चना की जाती है।
उज्जैन की बात करें तो अवंतिका या उज्जयनि नाम से प्रसिद्ध यह शहर पौराणिक काल में भारतवर्ष के सात सबसे पावन शहरों में गिना जाता है। मान्यता है कि श्री राम माँ सीता के साथ उज्जैन आए थे। बारह वर्ष में एक बार आयोजित होने वाले उज्जैन के कुम्भ मेले में राम घाट पर स्नान करना पवित्र माना जाता है। उज्जैन में ही शिप्रा नदी के किनारे स्थित है वाल्मीकि धाम। ऋषि वाल्मीकि की स्मृति में स्थापित इस आश्रम में बड़ी संख्या में ऋषि मुनि एवं श्रद्धालु उमड़ते हैं। वाल्मीकि घाट भी कुंभ मेले के आयोजन में एक विशेष स्थान रखता है जहां श्रद्धालु शिप्रा नदी में डुबकी लगाने आते हैं।
पर्यटन एवं विशेषकर धार्मिक पर्यटन हमारी अर्थव्यवस्था पर एक बहुत सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। पर्यटन से स्थानीय नवीन नौकरियों का निर्माण तो होता ही है, भौतिक परिसंपत्तियों का भी निर्माण होता है। नवीन होटल, खाने पीने के स्थान, आवागमन के साधन एवं छोटे व्यापारियों के उद्यम स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं। मध्य प्रदेश की प्रगति में पर्यटन का मुख्य योगदान हो सकता है।    मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर मैं आप सभी से करबद्ध निवेदन करूंगा कि हम सभी माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह को कार्यान्वित करें और हमारे देश के अधिक से अधिक भागों को जानें। आप सभी रामायण के माध्यम से हिन्दुस्तान का दिल देखें, मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपकी यात्रा भक्ति भाव से ओतप्रोत होगी एवं आप इस राज्य की प्रचुर साँस्कृतिक परम्परा का आनंद लेंगे।